कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषाएं: एआई के दौर में भाषाई असमानता और स्थानीय समाधान

09 Oct 2026
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषाएं: एआई के दौर में भाषाई असमानता और स्थानीय समाधान

"एआई केवल बहुसंख्यक भाषाओं का ही नहीं, बल्कि सही दिशा में इस्तेमाल करने पर यह अल्पसंख्यक भाषाओं को बचाने और उन्हें डिजिटल दुनिया में पुनर्जीवित करने का एक सशक्त जरिया बन सकता है।"

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है। इसके साथ ही, एआई भाषाई असमानता को भी बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि जनरेटिव एआई के पीछे काम करने वाले बड़े भाषा मॉडल (LLMs) में कुछ चुनिंदा भाषाओं का प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है, जबकि कई अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय भाषाएं लगभग गायब हैं।

बहुसंख्यक भाषाओं पर बेहतर काम करने वाले एआई मॉडल के विपरीत, जिन भाषाओं की ऑनलाइन मौजूदगी बहुत कम होती है, उनके बारे में मॉडल के पास पर्याप्त आंकड़े नहीं होते। इससे ऐसी भाषाओं में पूछे गए सवालों के गलत या अधूरे जवाब मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, पापुआ न्यू गिनी की हुला भाषा (लगभग 10,000 वक्ता) और तिमोर-लेस्ते की टेटुन भाषा (लगभग 10 लाख वक्ता) का एआई प्रशिक्षण आंकड़ों में प्रतिनिधित्व बेहद सीमित है।

एआई की मदद से स्थानीय समुदायों द्वारा निर्मित डिजिटल उपकरण

शोधकर्ताओं ने पिछले एक वर्ष में एक सकारात्मक प्रवृत्ति देखी है, जहां एआई स्थानीय समुदायों को अपनी जरूरत के मुताबिक डिजिटल उपकरण खुद तैयार करने में सक्षम बना रहा है:

वावानागी (पापुआ न्यू गिनी): हुला भाषा के समुदाय के पास भाषाविदों या सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमी के बावजूद, समुदाय के सदस्यों ने एआई आधारित कोडिंग उपकरणों की मदद से ‘वावानागी’ मंच का डिजाइन, निर्माण और संचालन किया। इसके जरिए अब अंग्रेजी-हुला के 12,000 से अधिक अनुवादों का डेटा जुटाया जा चुका है।

तुलुन (तिमोर-लेस्ते): यह मंच स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री को टेटुन भाषा में अनुवाद करने में मदद करता है। स्वास्थ्यकर्मियों और एआई मॉडल के सहयोग से यह उपकरण स्थानीय भाषा में सटीक स्वास्थ्य शब्दावली तैयार करने में सहायता करता है।

डिंका-अंग्रेजी शब्दकोश (दक्षिण सूडान): दक्षिण सूडान के अलियर मकोई अचूथ ने डिंका भाषा (लगभग 50 लाख वक्ता) के लिए एआई की मदद से डिंका-अंग्रेजी शब्दकोश ऐप तैयार किया है, जो भाषा के शब्द भंडार को बढ़ाने और डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने में मददगार साबित हो रहा है।

समुदायों के हाथ में तकनीक और स्थानीय समाधान

इन सभी पहलों का मुख्य उद्देश्य एआई का उपयोग करके स्थानीय ज्ञान को उसी भाषा और समुदाय तक वापस पहुंचाना है। एआई इन उपकरणों को तैयार करने में लगने वाले समय और खर्च को इतना कम कर रहा है कि अब समुदाय बिना किसी बाहरी वित्तीय सहायता के अपने डिजिटल साधन खुद बना और संचालित कर रहे हैं।

केन्या और नाइजीरिया जैसे देशों में एआई को अपनाने का स्तर अमेरिका के बराबर होना यह साबित करता है कि कम आय वाले क्षेत्रों में भी तकनीकी उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल साउथ में स्थानीय समुदायों को केवल एआई से प्रभावित होने वाले पक्ष के रूप में देखने के बजाय, उनके नेतृत्व वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

निष्कर्ष

चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर वैज्ञानिक कैट कुटे के अनुसार, जिस तरह आदिवासी समुदायों ने अपनी यात्रा की जरूरत के अनुसार मोटर कार को अपनाया था, उसी तरह अब वे अनुवाद और अपनी संस्कृति को सहेजने के लिए एआई को अपना रहे हैं। यदि सही दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो एआई भाषाई दूरियों को पाटने और लुप्तप्राय भाषाओं को पुनर्जीवित करने का एक क्रांतिकारी माध्यम बन सकता है।

 

 

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