डिजिटल युग की विडंबना: चमकते पर्दे और वीरान होती शिक्षा

09 Oct 2026
डिजिटल युग की विडंबना: चमकते पर्दे और वीरान होती शिक्षा

दुनिया के अमीर देशों में भी तकनीकी शिक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर पिछड़ रहे हैं बच्चे, रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले राज!

 

 

आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल क्रांति का युग माना जाता है, जहाँ हाथ में स्मार्टफोन और स्क्रीन हर युवा की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए वैश्विक आंकड़े एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। शिक्षा, तकनीकी प्रगति और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जारी रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक दुनिया और आर्थिक रूप से संपन्न देशों में भी बच्चों की डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

अमीर देशों में भी डिजिटल लर्निंग की रफ्तार सुस्त

आमतौर पर यह माना जाता है कि दुनिया के सबसे अमीर और विकसित देशों के बच्चे तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, वास्तविकता इसके विपरीत है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर देशों में भी 15 वर्ष की आयु के दस में से केवल एक बच्चा ही ऐसा है जो सप्ताह में एक घंटे से अधिक समय तक सीखने या शैक्षणिक गतिविधियों के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करता है।

यह इस बात का प्रमाण है कि स्क्रीन पर बिताया जाने वाला अधिकांश समय शिक्षात्मक या रचनात्मक कार्यों की बजाय केवल मनोरंजन या सोशल मीडिया तक सीमित होकर रह गया है। स्कूलों और घरों में तकनीकी उपकरणों का शैक्षणिक उपयोग अभी भी बहुत निचले स्तर पर है।

साइबरबुलिंग और सुरक्षा के मोर्चे पर नाकाफी कदम

डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। इनमें 'साइबरबुलिंग' (ऑनलाइन उत्पीड़न और प्रताड़ना) सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। रिपोर्ट के अनुसार:

वैश्विक स्तर पर केवल 16 फीसदी देशों ने ही शिक्षा के क्षेत्र में साइबरबुलिंग से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष कानून या नीतियां अपनाई हैं।

इन सीमित कानूनों में से भी 38 फीसदी कानून कोविड-19 महामारी के बाद की अवधि में लागू किए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि ऑनलाइन शिक्षा बढ़ने के बाद ही सरकारों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर गया है।

क्या कदम उठाने की जरूरत है?

डिजिटल माध्यम आज के समय में शिक्षा और विकास का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनका सुरक्षित और सार्थक उपयोग सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

शैक्षणिक उपयोग को बढ़ावा: स्कूलों में डिजिटल टूल्स का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए होना चाहिए।

कड़े कानूनी उपाय: दुनिया भर की सरकारों को चाहिए कि वे बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए सख्त नीतियां और मजबूत साइबर सुरक्षा कानून लागू करें।

डिजिटल साक्षरता: बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी सुरक्षित इंटरनेट के उपयोग और डिजिटल अनुशासन के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

डिजिटल तकनीक वरदान साबित हो सकती है, बशर्ते उसका उपयोग सही दिशा में और सुरक्षित माहौल के भीतर किया जाए।

 

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