बिहार में उद्यमिता : मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 4,800 लाभार्थियों को मिले 96 करोड़ रुपये
नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि 'रोजगारदाता' बन रहे हैं बिहार के युवा; एमएसएमई नीति से एक करोड़ से अधिक नए रोजगार का लक्ष्य।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत बिहार के युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले चरण में चयनित 4,800 लाभार्थियों को पहली किस्त के रूप में दो-दो लाख रुपये जारी किए गए हैं, जिससे कुल 96 करोड़ रुपये की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंची है। इस अवसर पर पटना के बापू सभागार में एक भव्य उन्मुखीकरण और प्रथम किस्त वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
युवाओं और महिलाओं में बढ़ रहा स्वरोजगार का रुझान
उद्योग एवं खेल विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह योजना युवाओं को खुद का कारोबार शुरू करने का अभूतपूर्व अवसर दे रही है। इसका सकारात्मक असर न केवल बिहार में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देगा। सरकार का लक्ष्य बिहार एमएसएमई नीति के माध्यम से आने वाले समय में एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है।
कार्यक्रम में अन्य मंत्रियों ने भी अपने विचार रखे:
मो. जमा खां (अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री): योजना के कारण अब महिलाएं और युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बन रहे हैं।
रमा निषाद (बीसी एवं ईबीसी कल्याण मंत्री): पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब खिलौना निर्माण, आईटी और रेडीमेड गारमेंट जैसे नए क्षेत्रों में स्वरोजगार तेजी से बढ़ रहा है।
लखेन्द्र कुमार रौशन (एससी एवं एसटी कल्याण मंत्री): यदि प्रशिक्षित युवा अपने साथ कुछ अन्य लोगों को भी जोड़ लें, तो लाखों लोग एक साथ आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
जमीन पर उतरती सफलता की कहानियां
मो. मुजम्मिल अंसारी (पटना): बुटीक का कारोबार चलाने वाले मुजम्मिल को इस योजना से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में बड़ी आर्थिक सहायता मिली है।
विराट कुमार (बेगूसराय): इन्होंने योजना की मदद से एक छोटी मैन्युफैक्चरिंग इकाई शुरू की है, जिससे यह साबित होता है कि अब बिहार के युवाओं की सोच राज्य में ही रहकर उद्योग स्थापित करने की बन चुकी है।
तनवीर आलम (कंकड़बाग, पटना): पहले दूसरों के सैलून में काम करने वाले तनवीर ने उद्यमी योजना की मदद से खुद का सैलून शुरू किया, और अब उनके यहां 7 अन्य युवा भी रोजगार पा रहे हैं।
यह पहल स्पष्ट करती है कि सही वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिलने पर बिहार के युवा राज्य को औद्योगीकरण और आर्थिक मजबूती की एक नई राह पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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