नाना पाटेकर और बीड: सिलाई मशीन और जुड़ी हुई यादें

09 Oct 2026
 नाना पाटेकर और बीड: सिलाई मशीन और जुड़ी हुई यादें

"संकट के समय जो हाथ उम्मीद बनकर आगे आते हैं, उनकी कमी हमेशा खलती है; नाना पाटेकर और बीड का रिश्ता कुछ ऐसा ही मानवीय और अटूट बंधन था।"

 

महाराष्ट्र के बीड जिले की राजश्री आसाराम परदेशी के लिए आजीविका और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की यादें एक ही धागे से जुड़ी हुई हैं। करीब 10 साल पहले जब उनके पति निर्माण कार्य के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर बिस्तर पर पड़ गए थे, तब पूरे परिवार की जिम्मेदारी राजश्री के कंधों पर आ गई थी। ऐसे भीषण संकट के समय 'नाम फाउंडेशन' (Nam Foundation) की ओर से मिली एक सिलाई मशीन ने उन्हें सम्मान के साथ जिंदगी दोबारा संवारने का जरिया दिया। अभिनेता नाना पाटेकर के 75 वर्ष की आयु में गोवा स्थित आवास पर हुए निधन के बाद जब उन्होंने सुबह उस मशीन को छुआ, तो पुरानी यादें ताजा हो गईं और उनका दिल भर आया।

मराठवाड़ा का सूखा और नाना पाटेकर की मानवीय पहल

बीड और नाना पाटेकर के बीच यह गहरा संबंध वर्ष 2015 में तब बना था, जब लगातार कई वर्षों के भीषण सूखे के कारण इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्याओं में चिंताजनक वृद्धि हुई थी। गांव-गांव में मातम और निराशा का माहौल था।

नाम फाउंडेशन की स्थापना: इस गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए अभिनेता नाना पाटेकर और प्रसिद्ध मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की।

स्थायी आजीविका के साधन: उनकी यह पहल केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रभावित परिवारों की महिलाओं को सिलाई मशीन, आटा चक्की और पशुधन उपलब्ध कराकर छोटे कारोबार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

जल संरक्षण और बीड के लिए बड़ा बदलाव

बीड जिला एक बार फिर गंभीर सूखे का सामना कर रहा है, जहां नदियां सूख चुकी हैं और ग्रामीण अपने मवेशियों के लिए पानी जुटाने को संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में पाटेकर के निधन से स्थानीय लोगों में एक गहरी खालीपन की भावना है।

नाम फाउंडेशन के जिला समन्वयक शिवराम घोडके के अनुसार, संगठन ने पानी की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए बीड में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के कार्य किए:

नदी गहरीकरण: बीड तहसील के पिंपलनेर क्षेत्र में फाउंडेशन ने ऋद्धि सिद्धि नदी के 34 किलोमीटर लंबे हिस्से में गाद निकलवाकर उसे चौड़ा कराया।

सिंचाई क्षमता में वृद्धि: इस पहल के बाद राज्य सरकार ने नदी पर चार छोटे बांध बनाए, जिससे 14 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिला।

बड़ा प्रभाव: जिलेभर में नालों, छोटी नदियों और जलाशयों से गाद निकालने के अभियानों से करीब 10,000 हेक्टेयर भूमि सिंचाई के दायरे में आई और लगभग एक लाख किसानों को फायदा हुआ।

निष्कर्ष

राजश्री परदेशी का यह दर्द केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि मराठवाड़ा के ग्रामीण इलाकों के हजारों परिवारों का साझा दुख है। सूखे की मार झेल रहे इन इलाकों की महिलाओं और किसानों के लिए नाना पाटेकर एक ऐसे बुजुर्ग और फरिश्ते की तरह थे, जिन्होंने मुश्किल समय में उनके जीवन में सम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाई थी। उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

 

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