स्वास्थ्य की छुपी हुई चुनौती: क्या आपकी थाली में सचमुच है पूरा पोषण?

09 Oct 2026
स्वास्थ्य की छुपी हुई चुनौती: क्या आपकी थाली में सचमुच है पूरा पोषण?

रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: दाल-रोटी खाने के बाद भी क्यों प्रोटीन के मामले में पिछड़ रहे हैं हम?

 

 

भारतीय भोजन अपनी विविधता और पौष्टिकता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। हर घर की थाली में दाल, चावल, रोटी, सब्जी और दूध जैसी पारंपरिक चीजें शामिल होती हैं। इसके बावजूद, देश की एक बहुत बड़ी आबादी अपनी दैनिक प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने में असमर्थ है। हाल ही में सामने आई 'द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया' रिपोर्ट ने देश में पोषण की स्थिति को लेकर एक गंभीर तस्वीर पेश की है, जिस पर विचार करना हम सभी के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

पांच प्रमुख शहरों पर आधारित अध्ययन

यह महत्वपूर्ण अध्ययन पेप्सिको इंडिया और यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल द्वारा भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) के सहयोग से किया गया है। इसकी गहराई को समझने के लिए देश के पांच महानगरों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि को शामिल किया गया। इस रिसर्च में लोगों के दैनिक खानपान, प्रोटीन की वास्तविक खपत और उनके आहार संबंधी आदतों के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया गया।

आंकड़ों के आईने में प्रोटीन संकट

रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 73 फीसदी लोगों के रोजमर्रा के भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं पहुंच पा रहा है। यदि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना करें, तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है:

शहरी आबादी: लगभग 44 फीसदी लोग अपनी दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

ग्रामीण आबादी: गांवों में यह आंकड़ा 36 फीसदी दर्ज किया गया है।

शहरी क्षेत्रों में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे प्रतिदिन 41 ग्राम से भी कम प्रोटीन मिल रहा है। इस कमी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं—करीब 60 फीसदी लोगों का मानना है कि प्रोटीन युक्त खाद्य उत्पाद महंगे हैं, जबकि 57 फीसदी लोगों ने बाजार में आसानी से मिलने वाले सुविधाजनक विकल्पों की कमी को इसकी वजह माना।

बच्चों के पोषण पर चिंता के बादल

यह रिपोर्ट केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं:

5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में: लगभग 35 फीसदी बच्चे बौनेपन (Stunting) का शिकार हैं।

कम वजन की समस्या: करीब 32 फीसदी बच्चे कम वजन से प्रभावित पाए गए हैं।

आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग हर तीसरे बच्चे के विकास में पोषण की कमी एक बड़ा अवरोध बन रही है।

थाली में बदलाव: महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं

आम धारणा यह है कि प्रोटीन के लिए महंगे सप्लीमेंट्स या फैंसी फूड्स खरीदना जरूरी है, लेकिन यह सच नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारे पारंपरिक और स्थानीय खाद्य पदार्थों में ही पर्याप्त प्रोटीन मौजूद होता है।

अपनी दैनिक थाली को बेहतर बनाने के लिए इन चीजों को नियमित रूप से शामिल किया जा सकता है:

शाकाहारी विकल्प: दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर और विभिन्न प्रकार के मेवे।

मांसाहारी विकल्प: अंडे और मछली।

संतुलन: रोटी या चावल के साथ दाल, चना या अन्य प्रोटीन स्रोतों को जोड़कर भोजन की पोषण गुणवत्ता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

श्रीअन्न (मिलेट्स) को दें अपनी डाइट में जगह

इस रिपोर्ट में मिलेट्स यानी श्रीअन्न (जैसे ज्वार, बाजरा और रागी) को दैनिक आहार का मुख्य हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। मिलेट्स फाइबर और कई जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों के बेहतरीन स्रोत हैं। इन्हें दाल, दूध, दही, अंडे या अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ आसानी से खाया जा सकता है।

यह साफ है कि प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए अपनी पूरी जीवनशैली या भोजन को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस अपनी सामान्य भारतीय थाली में थोड़ी समझदारी दिखाते हुए दाल, चना, सोया, डेयरी उत्पाद और स्थानीय अनाजों को सही मात्रा में शामिल करना एक आसान और असरदार समाधान साबित हो सकता है।

 

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