हर घर उद्यम, हर गांव समृद्ध: 'राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान' से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

09 Sep 2026
हर घर उद्यम, हर गांव समृद्ध: 'राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान' से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम: 50 लाख महिलाओं और 50 हजार सामुदायिक प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण से ग्रामीण आजीविका में आएगा क्रांतिकारी बदलाव।

 

 

ग्रामीण भारत में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की एक नई बयार बह रही है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के प्रयास अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। इसी कड़ी में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 'राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान' की औपचारिक शुरुआत की गई है, जो गैर-कृषि क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमों को गति देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का मादा रखता है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य और रणनीति

इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर एक मजबूत उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार करना है। इसके तहत दो प्रमुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

50 हजार CRPs का क्षमता वर्धन: जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले 50,000 सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों (CRPs) को विशेष उद्यम प्रोत्साहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यमों की पहचान, स्टार्टअप सहायता, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे।

50 लाख SHG सदस्यों का प्रशिक्षण: स्वयं सहायता समूहों (SHG) की 50 लाख महिला सदस्यों को उद्यमिता विकास का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर पेशेवर स्तर पर अपने व्यवसाय को संचालित कर सकें।

3 करोड़ 'लखपति दीदियां' बनाने के संकल्प को मिलेगी गति

मंत्रालय ने देश में कम से कम 3 करोड़ स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को 'लखपति दीदी' (जिनकी वार्षिक आय कम से कम ₹1 लाख हो) बनाने का संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ गैर-कृषि ग्रामीण उद्यमों का बड़े पैमाने पर उन्नयन बेहद आवश्यक है। अतीत में 'स्टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम' (SVEP) जैसे सफल मॉडलों ने यह साबित किया है कि सही प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यमी बन सकती हैं।

उच्चस्तरीय सहभागिता और वैश्विक सहयोग

इस दूरगामी पहल की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव द्वारा की गई। कार्यक्रम में नीति आयोग, नाबार्ड (NABARD), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, IFMR LEAD, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क जैसी शीर्ष संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों के वरिष्ठ निदेशकों और CEOs की उपस्थिति ने इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर एक सुदृढ़ ढांचा प्रदान किया है।

भविष्य के सकारात्मक और दूरगामी परिणाम

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान भारत के ग्रामीण अंचलों में समावेशी विकास का एक नया अध्याय लिखेगा। इस अभियान से निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव अपेक्षित हैं:

स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी: गैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और शहरों की ओर पलायन कम होगा।

औपचारिक वित्तीय समावेशन: प्रशिक्षित उद्यमियों को बैंकों और औपचारिक वित्तीय संस्थानों से जोड़कर आसान उद्यम ऋण प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्त होंगे।

आत्मनिर्भर और समावेशी विकास: हजारों दक्ष CRPs और लाखों प्रेरित महिला उद्यमियों के माध्यम से एक आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव और मजबूत होगी।

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं की क्षमता पर अटूट विश्वास का प्रतीक है। "हर घर उद्यम, हर गांव समृद्ध" का यह नारा आने वाले समय में ग्रामीण भारत की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार बनेगा।


More Blogs