सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल: 'आत्मनिर्भर भारत' और 'स्किल इंडिया' को वैज्ञानिक शोध से जोड़ती एक दूरदर्शी क्रांति

07 Sep 2026
सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल: 'आत्मनिर्भर भारत' और 'स्किल इंडिया' को वैज्ञानिक शोध से जोड़ती एक दूरदर्शी क्रांति

1.90 लाख से अधिक लाभार्थियों को सशक्त बना चुकी CSIR की यह राष्ट्रीय पहल अब अपने तीसरे चरण में उद्योग और शोध के बीच की खाई को पाट रही है।

 

 

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा संचालित 'सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल' (CSIR Integrated Skill Initiative) भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने वाला एक मील का पत्थर है। इसका मुख्य ध्येय वैज्ञानिक अनुसंधान (R&D) और उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच मौजूद कौशल अंतर को समाप्त करना है।

पहल की मुख्य विशेषताएं और दायरा

समावेशी पहुंच: इस कार्यक्रम के तहत स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं, ITI डिप्लोमा धारकों, छात्रों, शोधकर्ताओं से लेकर किसानों और ग्रामीण समुदायों तक को शामिल किया गया है।

व्यापक प्रशिक्षण मॉडल: अल्पकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रयोगशाला अनुभव, इंटर्नशिप और प्रमाणन प्रदान किया जाता है।

18 प्रमुख क्षेत्रों का समावेश: यह पहल राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM) के 36 प्रमुख क्षेत्रों में से 18 को कवर करती है। इनमें एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, लाइफ साइंसेज, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, आईटी, चमड़ा, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स जैसे महत्वपूर्ण उद्योग शामिल हैं।

उपलब्धियां और क्रमिक प्रगति

चरणप्रमुख उपलब्धियां व आंकड़े
चरण - I एवं II5,200 से अधिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1.90 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया (ग्रामीणों और महिलाओं पर विशेष जोर)।
चरण - III (जून 2025 से)डॉ. एन. कलैसेल्वी (महानिदेशक, CSIR) द्वारा शुभारंभ। इसके पहले ही वर्ष में 37 प्रयोगशालाओं के माध्यम से 425+ कार्यक्रमों द्वारा 14,000+ प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया गया।

 

निगरानी और नोडल एजेंसी

इस महत्वाकांक्षी योजना के समन्वय, समय-समय पर अनुश्रवण और गुणवत्ता मूल्यांकन का जिम्मा सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (HRDC), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) संभाल रहा है।

यह पहल भारत के युवाओं में वैज्ञानिक दक्षता, रोजगार क्षमता और उद्यमिता का समावेश कर एक सशक्त, कुशल और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।


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