कारपोरेट ग्रीनवॉशिंग पर लगाम: इंडोनेशिया में सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस के नए मानकों की दिशा में कदम

05 Sep 2026
कारपोरेट ग्रीनवॉशिंग पर लगाम: इंडोनेशिया में सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस के नए मानकों की दिशा में कदम

आईएपीआई (IAPI) ने 2029 से लागू होने वाले कड़े एश्योरेंस दायित्वों के बीच अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाने और पारदर्शी रिपोर्टिंग ढांचा तैयार करने का आह्वान किया।

 

 

पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता (Sustainability) का मुद्दा आज वैश्विक कॉर्पोरेट परिदृश्य के केंद्र में आ चुका है। कंपनियां अब बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल और ज़िम्मेदार व्यवसाय चलाने के दावे कर रही हैं। हालांकि, इन दावों के बीच 'ग्रीनवॉशिंग' (Greenwashing)—यानी वास्तविक स्थिति की तुलना में स्वयं को अधिक पर्यावरण-अनुकूल दिखाने का भ्रामक प्रयास—एक बड़े जोखिम के रूप में उभरा है।

इस भ्रामक जानकारी से निवेशकों और हितधारकों को बचाने के लिए स्थिरता रिपोर्टिंग की विश्वसनीय जांच आवश्यक हो गई है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक अकाउंटेंट्स ऑफ इंडोनेशिया (IAPI) ने वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों के आधार पर एक सुदृढ़ 'सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस पारिस्थिकी तंत्र' (Sustainability Assurance Ecosystem) बनाने का प्रस्ताव रखा है।

आईएपीआई का एकीकृत त्रि-स्तरीय मानक मॉडल

ग्रीनवॉशिंग के जोखिम को समाप्त करने और रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए IAPI ने तीन परस्पर-पूरक (complementary) मानकों को एकीकृत रूप से लागू करने का प्रस्ताव दिया है:

SAKb 5000 (सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस मानक): यह निरीक्षण और जांच के कार्यान्वयन की प्रत्यक्ष प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

SMM 1 एवं SMM 2 (गुणवत्ता प्रबंधन मानक): यह सुनिश्चित करता है कि जांच करने वाली संस्थाओं के पास काम को सही ढंग से निष्पादित करने के लिए पर्याप्त और मजबूत प्रणालियां मौजूद हैं।

नैतिकता मानक (Ethics Standards): यह जांचकर्ताओं और व्यवसायियों की पूर्ण स्वतंत्रता और तटस्थता बनाए रखने पर जोर देता है।

यह एकीकृत ढांचा अंतर्राष्ट्रीय मानकों ISSA 5000 और IESSA को अपनाने पर आधारित है, जिससे कंपनियों द्वारा प्रस्तुत स्थिरता संबंधी डेटा केवल औपचारिकता न रहकर एक प्रमाणित दस्तावेज़ बन सके।

बुनियादी ढांचा और क्षमता निर्माण की आवश्यकता

IAPI का स्पष्ट मानना है कि केवल तकनीकी क्षमता या मानकों का होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक संपूर्ण निगरानी प्रणाली और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा, जिसमें शामिल हैं:

पंजीकरण और प्रमाणन: एश्योरेंस सेवा प्रदाताओं के लिए कड़े प्रमाणन मानदंड।

स्वतंत्रता और प्रवर्तन: जांच के दौरान नैतिक निष्पक्षता बनाए रखना और उल्लंघनों पर कानूनी/नियामक प्रवर्तन सुनिश्चित करना।

2029 की समयसीमा और नियामक रूपरेखा

यह पहल इसलिए भी अत्यंत समयोचित है क्योंकि प्रस्तावित RPOJK (वित्तीय सेवा प्राधिकरण विनियमन मसौदा) के तहत चरणबद्ध तरीके से नियम लागू किए जा रहे हैं:

2029 का लक्ष्य: वित्तीय क्षेत्र की 'समूह 1' (Group 1) इकाइयों के लिए वर्ष 2029 की अवधि से 'सीमित विश्वास बीमा' (Limited Assurance Mandatory) अनिवार्य करने की योजना है।

बिजनेस फोरम चर्चा: इन विचारों को 26 अगस्त 2026 को जकार्ता में आयोजित बिजनेस मॉर्निंग फोरम—"इंडोनेशिया के लिए सतत बीमा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करके सतत रिपोर्टिंग पर विश्वास को मजबूत करना"—में प्रमुखता से साझा किया गया। इससे पूर्व, 24 जुलाई 2026 को SAKb 5000 के मसौदे का एक्सपोजर भी प्रकाशित किया जा चुका है।

RPOJK के अंतिम रूप लेने के साथ, यह नया ढांचा वित्तीय क्षेत्र के उद्यमियों (PUSK), इश्यूअर्स और सार्वजनिक कंपनियों के लिए सतत वित्त (Sustainable Finance) के प्रकटीकरण को विश्वसनीय बनाएगा। इससे निवेशकों, नियामकों और आम जनता के बीच कॉर्पोरेट स्थिरता दावों के प्रति एक नया विश्वास स्थापित होगा।


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