स्वास्थ्य सेवा में एआई क्रांति: ज़िम्मेदार तकनीक और मेडटेक का नया भारत

05 Sep 2026
स्वास्थ्य सेवा में एआई क्रांति: ज़िम्मेदार तकनीक और मेडटेक का नया भारत

विज्ञान भवन में 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' के दौरान जारी नॉलेज पेपर ने दिखाई एआई-सक्षम चिकित्सा की नई राह; पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर क्लिनिकल उपयोग पर ज़ोर।

 

 

भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का समावेश केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि चिकित्सा सुविधाओं के लोकतांत्रीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' के 9वें संस्करण के अवसर पर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा "एआई इन मेडटेक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए हेल्थकेयर में क्रांति" विषय पर एक महत्वपूर्ण नॉलेज पेपर जारी किया गया।

फिक्की (FICCI) के सहयोग से फार्मास्युटिकल्स विभाग और Praxis Global Alliance द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया यह प्रतिवेदन भारत में एआई-सक्षम मेडटेक इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति, अवसरों और भविष्य की चुनौतियों का एक समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

एआई और मेडटेक का रणनीतिक ढांचा

यह नॉलेज पेपर स्पष्ट करता है कि भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), IndiaAI मिशन, SAHI, BODH और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 जैसे ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से डिजिटल हेल्थ का सुदृढ़ आधार तैयार कर लिया है। हालांकि, असली चुनौती एआई समाधानों को केवल सफल 'पायलट प्रोजेक्ट्स' तक सीमित न रखकर उन्हें बड़े पैमाने पर दैनिक क्लिनिकल उपयोग में लाने की है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिखरे हुए स्वास्थ्य डेटा, सीमित साक्ष्यों और पुराने नियमों जैसी बाधाओं को दूर करना अनिवार्य है। भारत के पास अपनी उच्च स्तरीय सॉफ्टवेयर क्षमताओं, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लिनिकल विविधता और उभरते मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग बेस के बल पर एआई-सक्षम चिकित्सा तकनीकों के विकास में वैश्विक लीडर बनने का स्वर्णिम अवसर है।

गति बढ़ाने वाली 5 मुख्य प्राथमिकताएं

रिपोर्ट में भारत में ज़िम्मेदार और व्यापक एआई-सक्षम मेडटेक को अपनाने के लिए पाँच प्रमुख स्तंभों की रूपरेखा दी गई है:

मेडटेक: सबसे बड़ा और त्वरित अवसर: एआई के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा ज्ञान (Specialist Expertise) को सीधे मेडिकल डिवाइसेज में एकीकृत किया जा सकता है, जिससे सुदूर क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच आसान होगी।

इकोसिस्टम की कमी को दूर करना: हालाँकि भारत के पास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार का आधार मौजूद है, लेकिन डेटा के बिखराव, अनिश्चित रेगुलेशन और रीइम्बर्समेंट (भुगतान वापसी) के स्पष्ट रास्तों के अभाव में एआई को बड़े पैमाने पर लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

क्लिनिकल उपयोग के लिए तीन मुख्य सुधार: पायलट से रूटीन क्लिनिकल उपयोग की ओर बढ़ने के लिए एआई-रेडी डेटा व साक्ष्य तैयार करना, एडेप्टिव लाइफसाइकल-बेस्ड रेगुलेशन बनाना और एआई के मूल्य को पहचानने वाले खरीद व रीइम्बर्समेंट तंत्र विकसित करना आवश्यक है।

प्राथमिक और द्वितीयक देखभाल में सुगमता: एआई-इनेबल्ड डायग्नोस्टिक्स के व्यापक इस्तेमाल से प्राथमिक व द्वितीयक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की कमी पूरी होगी, कार्यकुशलता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षेत्रीय असमानता दूर होगी।

समग्र सहयोगात्मक मॉडल: सरकार, नियामक संस्थाएं, हेल्थकेयर प्रदाता, उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों को मिलकर एक ऐसा तंत्र बनाना होगा जो भारत को ज़िम्मेदार एआई-इनेबल्ड मेडटेक का वैश्विक केंद्र बना सके।

कार्यक्रम में वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति

ज्ञान पत्र के विमोचन समारोह में देश के नीति-निर्धारकों और उद्योग जगत के शीर्ष दिग्गजों ने भाग लिया। इस अवसर पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव व आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, डीपीआईआईटी के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ श्री सुनील कुमार बरनवाल और फिक्की के महासचिव श्री अनंत स्वरूप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत का मेडटेक क्षेत्र आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ सही नीतिगत नीव और ज़िम्मेदार तकनीक का तालमेल करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुलभ और सुरक्षित बना सकता है।


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