भारत-IFAD की नई साझेदारी से ग्रामीण भारत की बदलेगी तस्वीर: 2026-2033 की संयुक्त रणनीति का हुआ ऐलान
ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और जलवायु अनुकूलन पर केंद्रित होगी 8 वर्षीय COSOP रणनीति; 2.73 लाख करोड़ रुपये हुआ ग्रामीण विकास बजट।
भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने वर्ष 2026 से 2033 तक के लिए आठ वर्षीय ‘देश रणनीतिक अवसर कार्यक्रम’ (COSOP) की शुरुआत की है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाना, टिकाऊ आजीविका के अवसरों का विस्तार करना और सामाजिक-आर्थिक तथा जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रामीण समुदायों को मजबूत बनाना है।
IFAD-भारत साझेदारी और नई रणनीति के मुख्य बिंदु
संस्थागत मजबूती: स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों को वित्तीय सेवाओं, आधुनिक तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजारों से जोड़ा जाएगा।
वैश्विक ज्ञान साझाकरण: भारत के सफल विकास मॉडलों को 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) में बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए ज्ञान प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा।
पाँच दशकों का साथ: 1977 में स्थापित IFAD का मुख्यालय रोम में है, और भारत इसका संस्थापक सदस्य है। इस साझेदारी के तहत अब तक देश के कई राज्यों में 35 ग्रामीण विकास योजनाएं सफलतापूर्वक चलाई जा चुकी हैं।
ग्रामीण विकास में बदलाव के प्रमुख आंकड़े
बजट में 211% की भारी वृद्धि: ग्रामीण विकास का बजट आवंटन 2016-17 के 87,765 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 2.73 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट: अत्यधिक गरीबी घटकर 5.3% पर आ गई है, जो वैश्विक औसत से भी कम है। वहीं बहुआयामी गरीबी घटकर 11.28% रह गई है।
महिला नेतृत्व: 90.09 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए 10.05 करोड़ महिलाएं संगठित हुई हैं, जिन्हें 9 लाख सामुदायिक कार्यकर्ता (जैसे बैंक सखी, कृषि सखी) सहयोग दे रहे हैं।
प्रमुख सरकारी योजनाओं की प्रगति
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण): 31 दिसंबर, 2025 तक देश के 96% से अधिक गांवों ने ODF प्लस (खुले में शौच मुक्त और कचरा प्रबंधन में स्वच्छ) का दर्जा हासिल कर लिया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): 2017 की तुलना में बजटीय आवंटन 51% बढ़ा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऑल-वेदर रोड कनेक्टिविटी लगभग सार्वभौमिक हो चुकी है।
PMAY-G & सौभाग्या: 2029 तक सभी पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जबकि सौभाग्य योजना के तहत शत-प्रतिशत विद्युतीकरण प्राप्त किया जा चुका है।
कौशल व आजीविका: DAY-NRLM और DDU-GKY जैसी योजनाओं के जरिए विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में महिलाओं व युवाओं को रोजगार व उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है।
निष्कर्ष: 24 अप्रैल को मनाए जाने वाले 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' की भावना के अनुरूप, भारत का ग्रामीण विकास अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। पंचायती राज संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण से ग्रामीण भारत अब देश के समावेशी विकास का सबसे मजबूत चालक बन गया है।