प्सोस एजुकेशन मॉनिटर 2026: भारतीय शिक्षा प्रणाली और तकनीक पर बड़ा सर्वे, AI का स्वागत लेकिन सोशल मीडिया पर सख्ती की मांग
78% भारतीयों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का किया समर्थन; देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को लेकर दुनिया में सबसे ज्यादा आशावादी हैं भारतीय।
ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस (Ipsos Education Monitor 2026) के हालिया सर्वे के अनुसार, भारत में शिक्षा और तकनीक को लेकर लोगों का रुख काफी संतुलित और व्यावहारिक है। भारतीय नागरिक पढ़ाई में ध्यान भटकाने वाली तकनीकों पर पाबंदी चाहते हैं, जबकि सीखने में मदद करने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक टूल्स का खुलकर स्वागत कर रहे हैं।
तकनीक और AI पर जनमत
सोशल मीडिया पर बैन: 78% भारतीयों का मानना है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूल के अंदर और बाहर सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए।
स्मार्टफोन पर सख्ती: 57% लोग स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को बैन करने के पक्ष में हैं।
AI का समर्थन: केवल 26% लोग स्कूलों में ChatGPT जैसे AI टूल्स को बैन करने के पक्ष में हैं, जबकि 61% लोग इसके खिलाफ हैं और मानते हैं कि AI शिक्षा में सहायक हो सकता है।
भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर अटूट विश्वास
गुणवत्ता और वैल्यू: 51% भारतीयों ने अपनी शिक्षा प्रणाली को 'बेहतर' बताया (वैश्विक औसत 33% है)। 70% मानते हैं कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी डिग्री 'वैल्यू फॉर मनी' है।
करियर और समानता: 67% लोग मानते हैं कि मौजूदा पाठ्यक्रम छात्रों को भविष्य के करियर के लिए तैयार करता है, वहीं 72% का मानना है कि शिक्षा प्रणाली सामाजिक असमानता को कम करने में मददगार है।
युवाओं के भविष्य को लेकर भारी आशावाद
सर्वे में शामिल 31 देशों में भारतीय अपने युवाओं के भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा सकारात्मक पाए गए:
72% लोगों का मानना है कि देश के युवाओं का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
75% लोगों का मानना है कि आज के युवा अपने माता-पिता की तुलना में बेहतर जीवन जिएंगे।
76% लोगों का यह भी मानना है कि विदेश जाने से युवाओं को और बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
मुख्य चुनौतियां और कौशल का अंतर
सकारात्मकता के बावजूद, उत्तरदाताओं ने कुछ प्रमुख समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया:
स्किल गैप (36%): शिक्षा प्रणाली और श्रम बाजार की जरूरतों के बीच तालमेल की कमी सबसे बड़ी चिंता है।
मानसिक स्वास्थ्य व गरीबी (30%): युवाओं में अवसाद, तनाव और आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती है।
गुणवत्ता व तकनीक का प्रभाव: 29% लोग शिक्षा की गुणवत्ता और 26% लोग सोशल मीडिया/AI के दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
इप्सोस इंडिया के CEO सुरेश रामलिंगम का कहना है: "सर्वे के नतीजे बताते हैं कि भारत में शिक्षा और युवाओं के प्रति बहुत भरोसा है, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि हमारी शिक्षा प्रणाली तेजी से बदलते जॉब मार्केट के साथ तालमेल बिठाकर चले।"