हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026: MSME को 15 दिन में सैद्धांतिक मंजूरी, 3 साल तक सामान्य निरीक्षण से राहत
"व्यापार की सुगमता से एमएसएमई की उड़ान: हरियाणा में नए उद्योगों की स्थापना और विस्तार के लिए मिली 15 दिनों में सैद्धांतिक मंजूरी और तीन साल के मोरेटोरियम की बड़ी कानूनी गारंटी।"
हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नया उद्योग स्थापित करना और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करना अब पहले से कहीं अधिक आसान और त्वरित होगा। राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 'हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026' (Haryana Right to Business Act, 2026) को अधिसूचित कर दिया है।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) के MSME के लिए शुरुआती वैधानिक स्वीकृतियों को पूरी तरह समयबद्ध बनाना, लालफीताशाही को खत्म करना और कारोबार शुरू करने के दौरान आने वाली प्रशासनिक व प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करना है।
15 दिनों में 'सैद्धांतिक मंजूरी' और डीम्ड अप्रूवल
अधिनियम के तहत एमएसएमई के लिए स्वीकृतियों की समयसीमा और अपील की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी व सख्त बनाया गया है:
आशय की घोषणा (Declaration of Intent): पात्र उद्यम को जिला नोडल एजेंसी के पास अपनी सैद्धांतिक मंजूरी (In-Principle Approval) के लिए आशय की घोषणा जमा करनी होगी।
15 दिन की समयसीमा: जिला नोडल एजेंसी को आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर इस पर अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
अपील व समाधान व्यवस्था: यदि निर्धारित 15 दिनों में मंजूरी नहीं मिलती है, तो मामला स्वतः हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (HEPC) के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (DCEO) के पास चला जाएगा, जिन्हें अगले 10 दिनों के अंदर इस पर फैसला सुनाना होगा।
स्वचालित डीम्ड क्लियरेंस: समयबद्ध निर्णय न होने की स्थिति में स्वचालित डीम्ड अप्रूवल (Deemed Approval) का प्रावधान रखा गया है।
3 साल (36 महीने) का मोरेटोरियम: सामान्य निरीक्षण से छूट
छोटे और मध्यम उद्योगों को शुरुआती वर्षों में नौकरशाही के दबाव से मुक्त रखने के लिए इस कानून में एक ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है:
निरीक्षण से राहत: पात्र उद्यमों को परिचालन शुरू करने के बाद 36 महीने (3 वर्ष) की अवधि तक किसी भी सामान्य निरीक्षण (General Inspection) से छूट मिलेगी और कोई दंडात्मक/जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
शिकायत-आधारित विशेष निरीक्षण: यदि किसी गंभीर उल्लंघन या सुरक्षा मामले में शिकायत मिलती है, तो केवल तभी निरीक्षण किया जा सकेगा।
सख्त निरीक्षण नियम: शिकायत मिलने पर भी निरीक्षण करने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरण के प्रमुख को लिखित कारण दर्ज करने होंगे, और यह जांच संयुक्त निदेशक (Joint Director) या उससे उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा ही की जाएगी।
अनिवार्य वैधानिक प्रक्रियाएं और डिजिटल पोर्टल
तीन साल का मोरेटोरियम उद्यमों को नियामकीय अनुपालन से मुक्त तो करता है, लेकिन वैधानिक मंजूरियों को पूरी तरह समाप्त नहीं करता:
| पहलू | कानूनी प्रावधान व व्यवस्था |
|---|---|
| सिंगल विंडो पोर्टल | सभी अनिवार्य वैधानिक आवेदन 'इन्वेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो पोर्टल' (Invest Haryana Portal) के जरिए ही जमा करने होंगे। |
| डिजिटल ट्रैकिंग | जिला नोडल एजेंसी को आशय की घोषणा, सैद्धांतिक मंजूरी और डीम्ड अप्रूवल के पूरे रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने होंगे। |
| अपवाद और सुरक्षा | सुरक्षा, अनधिकृत निर्माण, भूमि के गलत इस्तेमाल या पर्यावरणीय खतरे की स्थिति में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। |
MSME पर प्रशासनिक बोझ में कमी: क्यों जरूरी था यह कानून?
मौजूदा नियामकीय व्यवस्था में किसी भी नए उद्योग को शुरू करने के लिए दर्जनों विभागों से अलग-अलग लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और पंजीकरण लेने पड़ते थे। क्रमवार (Sequential) चलने वाली इस लंबी प्रक्रिया के कारण समय और संसाधनों का अत्यधिक नुकसान होता था।
चूंकि MSME के पास बड़े औद्योगिक घरानों की तुलना में सीमित वित्तीय और प्रशासनिक संसाधन होते हैं, इसलिए मंजूरियों में देरी से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता था। हरियाणा सरकार का MSME निदेशालय इस कानून के जरिए छोटे व्यवसायों के लिए एक बेहद प्रतिस्पर्धी और अनुकूल कारोबारी माहौल (Ease of Doing Business) तैयार कर रहा है।
निष्कर्ष
हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026 राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला कदम है। 15 दिनों में सैद्धांतिक मंजूरी, तीन साल का निरीक्षण-मुक्त मोरेटोरियम और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से यह कानून एमएसएमई को सशक्त बनाएगा। इससे न केवल राज्य में नए निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों नए रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा।