साक्षरता का बदलता स्वरूप: अक्षर ज्ञान से एआई के दौर में विवेकपूर्ण नागरिक बनाने तक की यात्रा
8 सितंबर - अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर विशेष: केवल पढ़ना-लिखना जानना साक्षरता नहीं, बल्कि सही सूचना की पहचान, डिजिटल सुरक्षा और आत्मनिर्भरता ही है वास्तविक ज्ञान।
किसी बच्चे के हाथ में पहली बार पेंसिल आना और कागज पर अक्षर उकेरने की कोशिश करना भले ही एक छोटी-सी घटना लगे, लेकिन यह उसके जीवन में ज्ञान और आत्मनिर्भरता की नई यात्रा का आरंभ है। आज के आधुनिक दौर में साक्षरता की परिभाषा केवल शब्दों को पहचानने या दस्तखत करने तक सीमित नहीं रह गई है।
बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में 'कार्यात्मक साक्षरता' (Functional Literacy) ही वास्तविक साक्षरता है—यानी प्राप्त ज्ञान का उपयोग रोजमर्रा के निर्णयों, स्वास्थ्य सुरक्षा, अधिकारों की पहचान और सही-गलत के फर्क को समझने में करना।
वैश्विक और भारतीय परिदृश्य: आंकड़े और चुनौतियां
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पिछले कुछ दशकों में साक्षरता दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन सार्वभौमिक साक्षरता का लक्ष्य अभी भी दूर है।
| सूचकांक / क्षेत्र | वैश्विक स्थिति (2024) | भारतीय स्थिति (PLFS 2023-24) |
|---|---|---|
| वयस्क साक्षरता दर | 88% (15 वर्ष और उससे अधिक) | 80.9% (7 वर्ष और उससे अधिक) |
| युवा साक्षरता दर | 93% | — |
| निरक्षर वयस्कों की संख्या | 754 मिलियन (63% महिलाएं) | — |
| शीर्ष राज्य/क्षेत्र | यूरोप व उत्तरी अमेरिका (98%+) | मिजोरम (98.2%), केरल (95.3%) |
| पिछड़े राज्य/क्षेत्र | उप-सहारा अफ्रीका (69%) | आंध्र प्रदेश (72.6%), बिहार (74.3%) |
नोट: भारत के PLFS आंकड़े (7 वर्ष+) और वैश्विक आंकड़ों (15 वर्ष+) के आयु मापदंड भिन्न हैं।
साक्षरता के नए आयाम: डिजिटल युग की ज़रूरतें
महिला साक्षरता और सामाजिक सशक्तिकरण: दुनिया भर के निरक्षर वयस्कों में 63% महिलाएं हैं। जब एक महिला शिक्षित होती है, तो उसका प्रभाव केवल उस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्थिति में गुणात्मक सुधार आता है।
वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता: स्मार्टफोन रखना और इंटरनेट चलाना ही साक्षरता नहीं है। फर्जी लिंक, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचना, बैंक खाते का सही संचालन और डिजिटल भुगतान में सतर्कता बरतना आज की अनिवार्य आवश्यकता है।
मीडिया साक्षरता और फेक न्यूज: सूचना के इस अतिप्रवाह के दौर में सही और गलत खबर में अंतर करना (Critical Thinking) आवश्यक हो गया है। बिना प्रमाण जांचे सोशल मीडिया की बातों पर भरोसा न करना आधुनिक साक्षरता का हिस्सा है।
एआई (AI) और भविष्य की साक्षरता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मशीनी उत्तरों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय सही सवाल पूछना, एआई की सीमाओं को समझना और प्राप्त जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना ही 'AI साक्षरता' है।
भारत की पहल: ULLAS और मातृभाषा में शिक्षा
भारत में वयस्कों को शिक्षा से जोड़ने के लिए ULLAS (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) चलाया जा रहा है, जो 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों पर केंद्रित है जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए। इसके तहत केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति के तहत शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में देने पर बल दिया गया है, ताकि सीखने की प्रक्रिया सहज हो सके।
निष्कर्ष
साक्षरता केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, विवेक और आत्मनिर्भरता से जीवन जीने की शक्ति है। जब तक हर व्यक्ति को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित डिजिटल वातावरण नहीं मिलता, साक्षरता की यह यात्रा अधूरी रहेगी।