सांसों पर मंडराता दोहरा संकट: जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग ने घोला हवा में जहर

10 Sep 2026
सांसों पर मंडराता दोहरा संकट: जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग ने घोला हवा में जहर

डब्ल्यूएमओ (WMO) की नई रिपोर्ट का खुलासा: 1990 के दशक से तीन गुना बढ़ीं भीषण आग की घटनाएं, हर साल ले रही हैं 1 लाख से अधिक जानें।

 

 

7 सितंबर को ‘इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज’ (International Day of Clean Air For Blue Skies) के अवसर पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, जहरीली हवा और जलवायु परिवर्तन अब दो अलग-अलग समस्याएं नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे को विकराल बनाने वाला खतरनाक चक्र बन चुकी हैं।

उद्योगों और परिवहन के साथ-साथ अब जंगलों में भड़कती आग और बढ़ती लू (Heatwaves) हवा की गुणवत्ता को बदतर बना रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

जंगल की आग: धुएं का नया वैश्विक स्वास्थ्य संकट

रिपोर्ट में ग्लोबल एटमॉस्फियर वॉच नेटवर्क के आंकड़ों के आधार पर चेतावनी दी गई है कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका में औद्योगिक उत्सर्जन कम होने के बावजूद जंगल की आग के धुएं से होने वाला प्रदूषण तेजी से बढ़ा है।

तीन गुना वृद्धि: 1990 के दशक की तुलना में भारी धुएं वाली जंगल की आग की घटनाएं करीब 3 गुना बढ़ चुकी हैं।

सालाना मौतें: 2010 से 2018 के बीच आग के धुएं से हर साल अनुमानित 1,00,000 अतिरिक्त मौतें हुईं।

जहरीले प्रदूषक: जंगलों की आग से प्रतिवर्ष 14.3 करोड़ टन जहरीले कार्बनिक प्रदूषक वायुमंडल में घुल रहे हैं—जो पुराने अनुमानों से 21% अधिक है।

अधिक घातक प्रभाव: शोधकर्ताओं के अनुसार, आग से निकलने वाले कण सामान्य PM2.5 से कहीं अधिक जहरीले होते हैं। पारंपरिक मॉडल इससे होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों और मौतों को 93% तक कम आंकते हैं।

PM2.5 का क्षेत्रीय प्रभाव (2025 के आंकड़े)

भारत: बायोमास (ईंधन व पराली) जलाने और अन्य उत्सर्जनों के कारण PM2.5 का स्तर दीर्घकालिक औसत से अधिक बना रहा।

चीन: मानवीय गतिविधियों पर नियंत्रण और उत्सर्जन में कमी के कारण PM2.5 का स्तर औसत से नीचे दर्ज किया गया।

कनाडा, रूस व स्पेन: भीषण आग की घटनाओं के कारण ये क्षेत्र प्रदूषण के नए 'हॉटस्पॉट' बनकर उभरे।

बढ़ती गर्मी और ओजोन गैस का खतरा

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अत्यधिक गर्मी और लू केवल तापमान नहीं बढ़ातीं, बल्कि हवा में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करके भू-स्तरीय ओजोन (Ground-level Ozone) का निर्माण करती हैं। यह ओजोन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है और फसलों व पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुंचाती है।

WMO ने जोर देकर कहा है कि वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक एकीकृत और समन्वित नीति की तत्काल आवश्यकता है।


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