स्मार्ट गवर्नेंस की ओर कदम: अब एआई तय करेगा कि किसे सबसे पहले मिले सरकारी मदद

10 Sep 2026
स्मार्ट गवर्नेंस की ओर कदम: अब एआई तय करेगा कि किसे सबसे पहले मिले सरकारी मदद

आईआईटी कानपुर ने तैयार किया ‘फैमिली स्कोर’ सिस्टम; आंध्र प्रदेश में सफल परीक्षण के बाद कल्याणकारी योजनाओं को तुरंत और सटीक रूप से लागू करने की उम्मीद बढ़ी।

 

 

सरकारी योजनाओं का लाभ सही और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है। पारंपरिक रूप से करोड़ों परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए भारी-भरकम बजट, समय और घर-घर जाकर सर्वे करने की जरूरत होती थी। इस लंबी कागजी प्रक्रिया में कई गरीब परिवार अपने हक की सहायता के लिए महीनों इंतजार करते रह जाते थे।

इस समस्या का समाधान निकालते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर ने एयरावत रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से एक अत्याधुनिक एआई (AI) आधारित ‘फैमिली स्कोर’ (Family Score) सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम बिना कोई नया सर्वे कराए, पहले से मौजूद सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण कर परिवारों की आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करता है।

आईआईटी कानपुर और आंध्र प्रदेश सरकार की साझा पहल

इस एआई मॉडल का पहला प्रायोगिक परीक्षण आंध्र प्रदेश में किया गया, जिसके परिणाम पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में कहीं अधिक सटीक और तीव्र साबित हुए हैं।

डेटा स्रोतों का समन्वय: यह मॉडल राशन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े करीब 15 सरकारी डेटासेट का उपयोग करके एक गतिशील (Dynamic) फैमिली स्कोर तैयार करता है।

विस्तार योजना: दूसरे चरण के तहत इसे आंध्र प्रदेश स्टेट डेटा सेंटर से जोड़ा जाएगा। राज्य के कुल 1.72 करोड़ परिवारों में से लगभग 1.35 करोड़ (75%) परिवारों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य है।

लागत और समय में भारी कमी: बिना नया भौतिक सर्वेक्षण कराए सीधे सरकारी रिकॉर्ड से जरूरतमंदों की पहचान होने से समय और सरकारी धन दोनों की भारी बचत होगी।

ज़िम्मेदार और पारदर्शी एआई: मशीन केवल सुझाव देगी, फैसला अधिकारी करेंगे

प्रमुख विशेषताविवरण
पारदर्शिता (Explainability)एआई केवल स्कोर नहीं देगा, बल्कि यह कारण (Reason) भी बताएगा कि किसी परिवार को वह अंक क्यों मिले हैं।
मानवीय नियंत्रणअंतिम निर्णय मशीन के हाथ में नहीं होगा। एआई केवल विश्लेषणात्मक जानकारी देगा, अंतिम निर्णय प्रशासनिक अधिकारी ही लेंगे।
AirawatOS प्लेटफॉर्मशहरों के प्रबंधन के लिए विकसित प्लेटफॉर्म, जो सैटेलाइट, सेंसर और सरकारी रिकॉर्ड से डेटा एकत्र कर बेहतर शहरी योजना बनाने में मदद करेगा।

कल्याणकारी योजनाओं का नया भविष्य

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल और वाधवानी स्कूल ऑफ एआई के डीन प्रो. नितिन सक्सेना के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सेवा में भरोसेमंद और जिम्मेदार एआई का इस्तेमाल करना है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के समक्ष इसके नतीजे पेश किए गए, जहां इसे बेहद सराहा गया।

यह तकनीक केवल एक सर्वेक्षण विकल्प नहीं है, बल्कि सार्वजनिक प्रशासन को संवेदनशील, तीव्र और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यदि यह मॉडल व्यापक रूप से लागू होता है, तो जरूरतमंद परिवारों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे उनके हक का लाभ मिल सकेगा।


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