सुरक्षित खान-पान, बेहतर कल: पैकेज्ड फूड पर अब पहले दिन से लगेंगे सख्त हेल्थ वार्निंग लेबल
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद FSSAI का बड़ा फैसला; एडेड शुगर, नमक या फैट की सीमा पार होते ही पैकेज पर झलकेगी लाल चेतावनी।
देश में बढ़ते मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों के बीच डिब्बाबंद (पैकेज्ड) खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सर्वोच्च न्यायालय में स्पष्ट किया है कि वह पैकेज्ड फूड उत्पादों पर शुरुआत से ही कड़े चेतावनी लेबल लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम देश के करोड़ों उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों को अस्वास्थ्यकर खान-पान के प्रति जागरूक करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
क्या था FSSAI का शुरुआती प्रस्ताव?
पिछले महीने FSSAI ने फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) के तहत लाल रंग के हेक्सागोन (षट्कोण) आकार के चेतावनी लेबल का ड्राफ्ट पेश किया था। शुरुआती योजना के अनुसार, यह चेतावनी लेबल केवल उन्हीं उत्पादों पर अनिवार्य किया जाना था, जिनमें तीन मुख्य श्रेणियों—एडेड शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट—में से कम से कम दो श्रेणियों की मात्रा तय मानक से अधिक हो।
प्राधिकरण ने इन नियमों को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा था, ताकि उद्योग जगत को इसके अनुसार ढलने का समय मिल सके।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की चिंता और दो-चरणीय व्यवस्था पर सवाल
इस दो-चरणीय व्यवस्था पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उपभोक्ता संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि:
नियमों को ढीला रखने से उपभोक्ताओं तक सही और स्पष्ट जानकारी पहुँचने में अनावश्यक देरी होगी।
केवल एक हानिकारक तत्व (जैसे अत्यधिक चीनी या अत्यधिक नमक) की अधिकता वाले खाद्य उत्पाद बिना किसी चेतावनी के बिकते रहेंगे, जिससे जनस्वास्थ्य को नुकसान पहुँचेगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और FSSAI का रुख
गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दो चरणों में नियम लागू करने की मंशा पर सवाल उठाए। शीर्ष अदालत के कड़े रुख के बाद FSSAI ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अदालत को आश्वस्त किया कि वह पहले चरण से ही सख्त मानक लागू करने पर विचार कर रहा है।
नया विकल्प यह है कि यदि किसी उत्पाद में एडेड शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट में से किसी एक की भी मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो उस पर तुरंत लाल चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
“हम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित हैं, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर। यह मुद्दा सीधे तौर पर राष्ट्रीय हित से जुड़ा है और इसमें सभी हितधारकों को एकजुट होकर सहयोग करना चाहिए।” — जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ
भविष्य की राह और अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों से जारी आदेश का गहन अध्ययन करने और अपने बहुमूल्य सुझाव सौंपने को कहा है। अदालत इस मामले में जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए एक दूरगामी नीति तय करने के पक्ष में है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। यदि यह सख्त प्रस्ताव अंतिम रूप ले लेता है, तो भारत का पैकेज्ड फूड बाजार एक पारदर्शी और स्वास्थ्य-केंद्रित व्यवस्था की ओर बढ़ेगा, जहाँ उपभोक्ताओं को अपने आहार का चयन करने से पहले उसकी पूरी सच्चाई पता होगी।