चेन्नई का मामल्लन जलाशय विवाद: कोवलम-नेमेली आर्द्रभूमि के अस्तित्व और 7 हजार मछुआरा परिवारों की आजीविका पर संकट

06 Oct 2026
चेन्नई का मामल्लन जलाशय विवाद: कोवलम-नेमेली आर्द्रभूमि के अस्तित्व और 7 हजार मछुआरा परिवारों की आजीविका पर संकट

पेयजल परियोजना से खारे पानी के अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा; 45,000 प्रवासी पक्षी और पारंपरिक 'इरल थाझुवुथल' प्रथा प्रभावित।

 

 

तमिलनाडु सरकार द्वारा चेन्नई शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई जा रही मामल्लन जलाशय परियोजना (Mamallan Reservoir Project) का स्थानीय मछुआरा समुदायों, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों द्वारा तीव्र विरोध किया जा रहा है।

चेन्नई से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित कोवलम-नेमेली आर्द्रभूमि (Kovalam-Nemmeli Wetland) एक अनूठा खारा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र है, जहाँ बंगाल की खाड़ी का खारा पानी और मीठा पानी आपस में मिलते हैं। सरकार इस क्षेत्र को चेन्नई के छठे मीठे पानी के जलाशय में बदलने की योजना पर काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र की जैव विविधता और लवणता (Salinity) का संतुलन पूरी तरह बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

1. स्थानीय आजीविका और पारंपरिक प्रथा पर सीधा प्रहार

7,000 परिवार प्रभावित: परियोजना के कारण आसपास के 16 गाँवों के लगभग 7,000 मछुआरा परिवार अपनी पारंपरिक आजीविका खोने की कगार पर हैं।

इरुलर आदिवासी समुदाय पर असर: विशेष रूप से इरुलर जनजातीय समुदाय की महिलाओं की आजीविका पर इसका गहरा असर पड़ रहा है।

'इरल थाझुवुथल' (Iral Thazhuvuthal) प्रथा: यह हाथ और पैरों से झींगा तथा मछली पकड़ने की सदियों पुरानी पारंपरिक विधि है, जिसमें किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता।

प्रमुख कमाई का जरिया: मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर के बीच मछली पकड़ने के सीजन में प्रत्येक परिवार 1 लाख से 3 लाख रुपये तक कमा लेता है, जिससे उनका पूरे साल का जीवनयापन चलता है।

2. पारिस्थितिकी तंत्र और प्रवासी पक्षियों पर खतरा

भारत मक्कल कषगम के प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र से संपर्क टूटने और मीठा पानी भरने से यह खारा आर्द्रभूमि तंत्र नष्ट हो जाएगा:

प्रभावित क्षेत्रसंभावित नुकसान एवं प्रभाव
प्रजातियाँमछली, झींगा, केकड़ा सहित लगभग 232 जीवों की प्रजातियों के विलुप्त होने या नष्ट होने का खतरा।
प्रवासी पक्षीमध्य एशियाई उड़न मार्ग (Central Asian Flyway) से आने वाले लगभग 45,000 प्रवासी पक्षी (जिनमें 16,000 प्रवासी बतखें शामिल हैं) प्रभावित होंगे।
भौतिक संरचनायह 8,500 एकड़ (30 किमी परिधि) में फैला मिट्टी का तटबंध (Earthen Embankment) है। प्रथम चरण में 4,375 एकड़ पर काम जारी है।

 

3. आर्थिक मंदी और समुद्री प्रतिस्पर्धा

परियोजना का कार्य अभी शुरुआती चरण में होने के बावजूद इसके गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव दिखने लगे हैं:

आय में भारी गिरावट: आर्द्रभूमि तक पहुँच बाधित होने से मछुआरों की आय घटकर आधी रह गई है।

समुद्र में प्रतिस्पर्धा: पहले जो 500 मछुआरे आर्द्रभूमि और 500 समुद्र पर निर्भर थे, अब सभी 1,000 मछुआरे समुद्र की ओर रुख कर रहे हैं। इससे एक ही क्षेत्र में अधिक नावें होने के कारण प्रति मछुआरा मछली की पकड़ और कमाई दोनों घट गई है।

 

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