कानपुर देहात: वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सशक्तीकरण पर जोर
"उम्र केवल एक संख्या है; तकनीक को सीखकर और सुरक्षित रहकर बुजुर्ग भी आधुनिक और 'विकसित भारत' की दिशा में सशक्त भागीदार बन सकते हैं।"
कानपुर देहात के रनिया स्थिति वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना, दैनिक जीवन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना और उन्हें तेजी से बढ़ते ऑनलाइन वित्तीय अपराधों व साइबर धोखाधड़ी (Online Fraud) से सुरक्षित रखना था।
1. मुख्य अतिथि का संबोधन: डिजिटल साक्षरता और विकसित भारत
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य (MLC) अविनाश सिंह चौहान ने शिरकत की।
विकसित भारत अभियान: MLC अविनाश सिंह चौहान ने 'डिजिटल साक्षरता' को प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत अभियान' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
तकनीक अपनाने की प्रेरणा: उन्होंने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को प्रेरित करते हुए कहा कि नई तकनीक को सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यदि वरिष्ठ नागरिक स्मार्ट फोन और डिजिटल बैंकिंग को समझें, तो वे आत्मनिर्भर होकर अपने दैनिक कार्यों को सुलभ बना सकते हैं।
साइबर सतर्कता: उन्होंने दैनिक जीवन में आने वाले संदिग्ध कॉल, मैसेज, ओटीपी (OTP) फ्रॉड और फर्जी लिंक से सावधान रहने के व्यावहारिक तरीके साझा किए।
2. व्यावहारिक प्रशिक्षण और डिजिटल कौशल
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया से जुड़ी मूलभूत और सुरक्षात्मक जानकारियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया:
| प्रशिक्षण का विषय | मुख्य बिंदु / सुरक्षा उपाय |
|---|---|
| मोबाइल बैंकिंग | UPI, वॉलेट और नेट बैंकिंग के सुरक्षित उपयोग की जानकारी। |
| डिजिटल लेन-देन | दुकानों या सेवाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान के सही तरीके। |
| साइबर सुरक्षा | किसी अनजान व्यक्ति से OTP, पिन (PIN) या बैंक विवरण साझा न करने की हिदायत। |
| ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव | लॉटरी, संदिग्ध कॉल या फर्जी मैसेज की पहचान और रिपोर्टिंग के तरीके। |
3. गरिमामयी उपस्थिति और आयोजक
इस अवसर पर शिक्षा, कौशल विकास और वृद्धाश्रम प्रबंधन से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे:
अधिकारी एवं प्रतिनिधि: नोडल प्रधानाचार्य कपिल मिश्र, कार्यदेशक अनिल चन्द्र श्रीवास्तव, सुरेश दत्त तिवारी और कौशल विकास मैनेजर कृष्ण कुमार साहू।
वृद्धाश्रम प्रबंधन: प्रबंधक एस. डी. काला, संचालक राजेन्द्र सिंह, रिषभ तिवारी तथा राम जी दुबे।
उपस्थित सभी अतिथियों और आयोजकों ने वृद्धाश्रम के निवासियों के साथ संवाद स्थापित किया और उन्हें आश्वस्त किया कि तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल से वे अपने परिजनों से जुड़े रहने के साथ-साथ डिजिटल युग के लाभ उठा सकते हैं।
निष्कर्ष: समावेशी और सुरक्षित डिजिटल समाज की ओर
रनिया वृद्धाश्रम में आयोजित यह पहल दर्शाती है कि डिजिटल क्रांति का लाभ समाज के हर वर्ग और आयु तक पहुँचना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल रूप से साक्षर और सतर्क बनाकर न केवल उन्हें साइबर अपराधियों के जाल से बचाया जा सकता है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ जोड़े रखा जा सकता है।
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