युवा दिल और गहराती चिंता: क्या आपकी जीवनशैली दे रही है हृदय रोग को न्योता?
विश्व हृदय दिवस 2026: आईसीएमआर का 729 मामलों का अध्ययन, युवाओं में अचानक मौत के पीछे पारिवारिक इतिहास और जीवनशैली से जुड़े खतरों का पर्दाफाश।
हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर दुनिया भर में हृदय स्वास्थ्य को लेकर जन-जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है। इस वर्ष का मुख्य ध्यान युवाओं में तेज़ी से बढ़ते हृदय संबंधी खतरों, पारिवारिक इतिहास के प्रभाव और समय रहते इनके संकेतों को पहचानने पर केंद्रित है। विश्व हृदय महासंघ (World Heart Federation) के वर्ष 2026 के अभियान का संदेश “डोंट मिस अ बीट” (Don't Miss a Beat) भी यही याद दिलाता है कि दिल से जुड़े छोटे-से-छोटे लक्षणों को भी नज़रअंदाज़ न करें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।
पारंपरिक रूप से हृदय रोगों को बुज़ुर्गों या ढलती उम्र के लोगों से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि, हालिया वर्षों में कम उम्र के युवाओं में भी हृदय से जुड़ी गंभीर और जानलेवा समस्याएं देखने को मिल रही हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह दावा करना कठिन है कि भारत में युवाओं के भीतर हार्ट अटैक के मामलों में कोई निश्चित प्रतिशत वृद्धि हुई है—इसके लिए और अधिक विस्तृत तथा बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह की आवश्यकता है—फिर भी स्थिति की गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता।
वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य: मौत का सबसे बड़ा कारण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियां (Cardiovascular Diseases) पूरे विश्व में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण बनी हुई हैं।
वैश्विक आंकड़े: अकेले वर्ष 2022 में हृदय संबंधी बीमारियों के कारण दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ (19.8 मिलियन) लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
भारतीय स्थिति: भारत में भी गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) में हृदय रोग का बड़ा हिस्सा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट में देश में बढ़ते हृदय रोगों के बोझ और उनके रोकथाम के प्रयासों पर विशेष बल दिया गया है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल की देखभाल अब केवल ढलती उम्र का विषय नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के लिए भी यह प्राथमिक चिंता बन चुका है।
आईसीएमआर का युवाओं पर केंद्रित बहुकेन्द्रीय अध्ययन
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेतृत्व में एक व्यापक बहुकेन्द्रीय (Multi-centric) अध्ययन आयोजित किया गया। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में बिना किसी स्पष्ट और पूर्व-विदित कारण के होने वाली अचानक मौतों (Unexplained Sudden Deaths) के पीछे छिपे कारणों की जांच करना था।
अध्ययन के प्रमुख बिंदु:
विस्तृत दायरा: अध्ययन में देश भर के 47 प्रमुख अस्पतालों को शामिल किया गया।
केस-कंट्रोल विश्लेषण: इसमें अचानक मौत के 729 मामलों की तुलना समान जनसांख्यिकीय पृष्ठभूमि वाले 2,916 स्वस्थ व्यक्तियों से की गई।
अध्ययन से उजागर हुए मुख्य जोखिम कारक:
पारिवारिक इतिहास: जिन युवाओं के परिवार में पहले बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक मौत का इतिहास रहा हो, उनमें जोखिम काफी अधिक देखा गया।
कोविड-19 से जुड़ा इतिहास: अतीत में गंभीर कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति।
व्यसन एवं नशा: अत्यधिक मात्रा में शराब (Alcohol) का सेवन तथा अन्य नशीले पदार्थों (Substance Abuse) का इस्तेमाल।
ध्यान देने योग्य बात: यह अध्ययन युवाओं में केवल 'हार्ट अटैक की बढ़ती दर' मापने के लिए नहीं था, बल्कि यह बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक होने वाली मौतों के जोखिम कारकों को समझने पर केंद्रित था। अतः इसके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि युवाओं में हार्ट अटैक का प्रतिशत कितना बढ़ा है।
जीवनशैली, अस्वस्थ आदतें और अदृश्य खतरे
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं के पीछे केवल आनुवंशिक कारण ही नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कई कारक भी समान रूप से जिम्मेदार हैं:
धूम्रपान और तंबाकू सेवन: यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर थक्के जमने (Blood Clots) की संभावना बढ़ा देता है।
असंतुलित खान-पान व तनाव: जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) में कमी और लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव।
अदृश्य स्वास्थ्य समस्याएं: उच्च रक्तचाप (Hypertension), मधुमेह (Diabetes) और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) अक्सर शुरुआती चरणों में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बने रहते हैं। युवा खुद को पूरी तरह स्वस्थ समझते हैं, जबकि शरीर के भीतर ये समस्याएं धीरे-धीरे हृदय को नुकसान पहुंचा रही होती हैं।
इसके अतिरिक्त, पारिवारिक इतिहास भी एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आपके कुल में किसी को कम उम्र में दिल का दौरा या अचानक मौत का सामना करना पड़ा है, तो आनुवंशिक रूप से यह खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो जाता है।
समय पर जांच और बचाव के प्रभावी कदम
आईसीएमआर की रिपोर्ट में 40 से 69 वर्ष की आयु के भारतीयों के लिए आगामी 10 वर्षों में हृदय संबंधी खतरों का पूर्वानुमान लगाने के तरीकों पर भी काम किया गया है। ऐसे जोखिम-मूल्यांकन (Risk Assessment) मॉडल से उन व्यक्तियों की समय रहते पहचान की जा सकती है, जिन्हें भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का अधिक खतरा है।
विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि युवावस्था दिल की बीमारियों से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। दिल को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतना अनिवार्य है:
नियमित स्वास्थ्य जांच: समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल) का परीक्षण कराएं।
पारिवारिक इतिहास के प्रति सतर्कता: यदि परिवार में हृदय रोग या अचानक मौत की हिस्ट्री रही है, तो 20 वर्ष की आयु के बाद से ही नियमित कार्डिएक चेकअप शुरू करें।
व्यसनों से दूरी: तंबाकू, धूम्रपान, अत्यधिक शराब और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें।
सक्रिय जीवनशैली: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम (जैसे तेज चलना, तैरना या योग) करें और संतुलित, पोषक आहार लें।
निष्कर्ष:
विश्व हृदय दिवस 2026 हमें यह संदेश देता है कि दिल के स्वास्थ्य के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। युवावस्था में अपने शरीर से मिलने वाले छोटे संकेतों को भी हल्के में न लें। सही समय पर खतरे की पहचान, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही हम अपने और अपने प्रियजनों के दिल की रक्षा कर सकते हैं।
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