एलपीजी कवरेज का सच: कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन रसोई में अब भी सुलग रही है लकड़ी
सीईईडब्ल्यू (CEEW) के नए अध्ययनों से उजागर हुआ कि रिफिल की उच्च कीमत, होम डिलीवरी का अभाव और दस्तावेजी जटिलताएँ भारत में स्वच्छ ईंधन के पूर्ण उपयोग में बड़ी बाधा हैं।
भारत में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) और एलपीजी विस्तार अभियानों के माध्यम से करोड़ों परिवारों तक रसोई गैस की पहुँच दर्ज की गई है। लेकिन काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) द्वारा 6 राज्यों के ग्रामीण परिवारों, शहरी झुग्गी बस्तियों और 10 शहरों के प्रवासी श्रमिकों पर किए गए तीन अध्ययनों के निष्कर्ष बताते हैं कि केवल कनेक्शन मिल जाना रसोई को पूरी तरह धुएँ से मुक्त करने की गारंटी नहीं है।
मुख्य निष्कर्ष: कनेक्शन बनाम वास्तविक उपयोग
| वर्ग / समूह | एलपीजी उपयोगकर्ता (%) | पूर्णतः एलपीजी पर निर्भर (%) | मुख्य चुनौतियाँ |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण परिवार | 73% | 23% | 50% परिवार मुख्य रूप से लकड़ी पर निर्भर; केवल 47% को मिलती है होम डिलीवरी। |
| शहरी झुग्गी बस्तियाँ | ~70% (पूरी निर्भरता) | उच्च | पते के प्रमाण (Address Proof) जैसे दस्तावेजों की कमी से औपचारिक कनेक्शन न मिलना। |
| प्रवासी श्रमिक | 74% | निम्न | 79% के पास औपचारिक कनेक्शन नहीं; 4% से कम पीएमयूवाई से जुड़े। |
प्रमुख बाधाएँ: तीन मुख्य कारण
अंतिम छोर तक आपूर्ति का अभाव (Delivery Gap): ग्रामीण क्षेत्रों में महज 47% उपभोक्ताओं को सिलेंडर की होम डिलीवरी मिलती है। समय और परिवहन लागत की वजह से लोग पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने को मजबूर होते हैं।
कागजी बाधाएँ और असंगठित बाजार: पते के प्रमाण के अभाव में 31% शहरी गरीब औपचारिक कनेक्शन से वंचित रह जाते हैं। वे अनौपचारिक बाजार से ₹803 का सिलेंडर ₹1,040 तक में (या ₹71/किग्रा की दर से) खरीदने पर मजबूर हैं।
लागत और सामर्थ्य (Affordability Factor): अध्ययनों के अनुसार, लगभग 80% परिवार 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर को ₹400 में पाने पर ही पूरी तरह एलपीजी अपनाने को तैयार हैं। वर्तमान प्रभावी सब्सिडी के बाद भी कीमत (~₹642) उनकी वहन क्षमता से अधिक है।
"स्वच्छ ईंधन नीति को अब केवल 'कनेक्शन बाँटने की संख्या' से आगे बढ़कर 'नियमित और पूर्ण इस्तेमाल' पर ध्यान केंद्रित करना होगा।"
— CEEW अध्ययन निष्कर्ष
CEEW द्वारा सुझाए गए व्यावहारिक समाधान
सब्सिडी में वृद्धि: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय PMUY के तहत सब्सिडी में लगभग ₹200 प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त वृद्धि पर विचार करे, ताकि कीमत ₹400 के करीब आ सके।
प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष अभियान: तेल विपणन कंपनियाँ नियोक्ताओं और ठेकेदारों के साथ मिलकर प्रवासियों हेतु नामांकन अभियान चलाएँ तथा छोटे (माइक्रो) रिफिल कियोस्क स्थापित करें।
डोर-स्टेप डिलीवरी प्रोत्साहन: ग्रामीण और दूरदराज के वितरकों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए ताकि हर घर तक आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
दस्तावेजी सरलीकरण: शहरी स्थानीय निकाय झुग्गी बस्तियों के निवासियों को बिना पते के प्रमाण की जटिलता के औपचारिक कनेक्शन दिलाने को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष:
स्वच्छ ईंधन पहल की वास्तविक सफलता इस बात से तय नहीं होगी कि कितने कनेक्शन कागजों पर दर्ज हैं, बल्कि इससे तय होगी कि कितनी रसोइयों में लकड़ी के धुएँ की जगह साफ हवा ने ले ली है। एलपीजी का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए कीमत, पहुँच और सरलता को एक साथ साधना होगा।