जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हरित वित्त और टिकाऊ विकास पर CII की रिपोर्ट

03 Sep 2026
जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हरित वित्त और टिकाऊ विकास पर CII की रिपोर्ट

हरित वित्तपोषण (Green Finance), कार्बन बाजार और पारदर्शी रिपोर्टिंग के माध्यम से भारत की सतत विकास यात्रा को गति देने की सिफारिश

 

 

भारत को अपने दीर्घकालिक जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्यावरण अनुकूल उपायों (Green and Sustainable Measures) से जुड़े निवेश को तेजी से बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा गठित उच्चस्तरीय ‘इंडिया सस्टेनेबिलिटी टास्कफोर्स 2026’ की नवीनतम रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है।

इस टास्कफोर्स में उद्योग जगत, नीति-निर्माण और शिक्षा जगत से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों व प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय उद्यमों को टिकाऊ विकास की राह पर सुगमता से आगे बढ़ाना है।

टिकाऊ विकास की राह में मुख्य चुनौतियाँ

CII की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में सतत और हरित विकास की राह में निम्नलिखित प्रमुख बाधाएँ मौजूद हैं:

परिभाषाओं में अस्पष्टता: यह स्पष्ट करने वाली सर्वमान्य परिभाषाओं की कमी है कि किन गतिविधियों को वास्तविक रूप से 'टिकाऊ' (Sustainable) या 'पर्यावरण अनुकूल दिशा में बदलाव' (Transition) लाने वाली गतिविधि माना जाए। इस भिन्नता के कारण निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

आंकड़ों की गुणवत्ता: टिकाऊपन से जुड़े रिपोर्ट किए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा प्रकटीकरण (Disclosures) और रिपोर्टिंग मानक अभी शुरुआती व निरंतर विकसित होते चरण में हैं।

CII टास्कफोर्स की प्रमुख सिफारिशें

देश में हरित वित्त को बढ़ावा देने और उद्योग जगत को टिकाऊ बनाने के लिए रिपोर्ट में निम्नलिखित व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:

विश्वसनीय कार्बन बाजार का विकास: देश में एक पारदर्शी और मजबूत कार्बन बाजार (Carbon Market) विकसित किया जाए, जिससे पर्यावरण अनुकूल पहलों को आर्थिक प्रोत्साहन मिल सके।

नामित हरित वित्त संस्थान (GFI): सरकार द्वारा एक विशेष हरित वित्त संस्थान (Dedicated Green Finance Institution - GFI) से जुड़ी सार्वजनिक राजस्व प्रणाली की स्थापना की जाए। यह संस्थान जलवायु और हरित बदलाव से जुड़ी पात्र परियोजनाओं के लिए पारदर्शी वित्तपोषण (Transparent Financing) सुनिश्चित करेगा।

चरणाबद्ध टिकाऊपन रिपोर्टिंग: उद्यमों के लिए टिकाऊपन संबंधी रिपोर्टिंग (Sustainability Reporting) और हरित बदलाव की योजनाओं को व्यापक बनाया जाए:

प्रारंभिक चरण: इसकी शुरुआत सबसे पहले बड़ी, अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर औद्योगिक इकाइयों से की जाए।

विस्तार चरण: जैसे-जैसे अन्य कंपनियों की रिपोर्टिंग क्षमता बढ़ेगी, इसका विस्तार छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तक किया जाए।

CII की यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि स्पष्ट नीतियों, पारदर्शी वित्तपोषण और उद्योग-व्यापी सहयोग के माध्यम से भारत अपने आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से भी प्रभावी ढंग से निपट सकता है।


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